
सुफ़यान सैफ/मेवात टाइम्स
नूंह/चंडीगढ़।
मेवात क्षेत्र के युवाओं और ड्राइवरों के लिए बड़ी खबर है। गांव छपेड़ा (जिला नूंह) में प्रस्तावित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईडीटीआर) की स्थापना के लिए आखिरकार प्रशासनिक मंजूरी जारी कर दी गई है। परिवहन विभाग, हरियाणा द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार परियोजना के निर्माण हेतु 32 करोड़ 63 लाख 81 हजार 454 रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
यह परियोजना वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की घोषणा (घोषणा संख्या 15241 दिनांक 23 अक्टूबर 2016) के तहत स्वीकृत की गई थी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री Bhupinder Singh Hooda के कार्यकाल में मेवात क्षेत्र में ड्राइवरों के प्रशिक्षण और रोजगार सृजन को ध्यान में रखते हुए इस संस्थान की योजना बनाई गई थी।
बजट आवंटन भी हुआ जारी
परिवहन आयुक्त, हरियाणा की ओर से जारी पत्र के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत प्रथम चरण (फेज-1) के लिए 7 करोड़ 73 लाख 98 हजार रुपये की राशि जारी की गई है। यह राशि भूमि क्रय एवं निर्माण कार्य के लिए निर्धारित की गई है।
लंबे संघर्ष के बाद मिली रफ्तार
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से यह परियोजना कागजों में अटकी हुई थी। सरकार बदलने के बाद काम की रफ्तार धीमी पड़ गई थी, जिससे क्षेत्र में असंतोष भी रहा। सड़क से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे को उठाया गया। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने लगातार मांग की कि मेवात जैसे पिछड़े क्षेत्र में ड्राइविंग ट्रेनिंग संस्थान शुरू होना युवाओं के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
आफताब अहमद की सक्रिय भूमिका
इस पूरे मुद्दे को लगातार उठाने में नूंह से विधायक Aftab Ahmed की भूमिका अहम मानी जा रही है। उन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर कई बार इस परियोजना को शुरू करने की मांग उठाई। सूत्रों के अनुसार हाल ही में विभागीय स्तर पर हुई बैठकों में भी उन्होंने फाइल को आगे बढ़ाने के लिए दबाव बनाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार जनदबाव और स्थानीय नेतृत्व की सक्रियता के चलते ही अब इस परियोजना को अंतिम रूप मिल सका है।
क्षेत्र को होगा सीधा लाभ
आईडीटीआर की स्थापना से मेवात के युवाओं को पेशेवर ड्राइविंग प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उन्हें देश-विदेश में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। साथ ही सड़क सुरक्षा और प्रशिक्षित ड्राइवरों की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासनिक मंजूरी के बाद निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा और वर्षों से लंबित यह परियोजना धरातल पर उतर सकेगी।
